अभागा मैं
हर किसी को प्यार नहीं मिलता यहां रह जाता हम जैसा कोई दीवाना यहां इस दुनिया से उठने वाला है दिल मेरा रोक ले कोई उठने से मेरा जनाज़ा यहां कोई क्यूं प्यार करेगा इस शक्स को मुझसे पहले मरा हुआ है जमाना यहां हो सकता है कोई दिलकश भी बची हो हो सकता है कोई महफ़ूज़ भी रखी हो आयेगा मेरे हक में कैसे किसी का प्यार रखता हूँ जो खुद का बंद कमरा यहां सोचता हूं खुल जाऊँ अपने लोगों से पहचानता नहीं कौन है अपना यहां वैसे तो डर नहीं है कुछ खास मुझे पर डरता हु बन जायेगा मेरा तमाशा यहां इसी गुमनामी में दुखता है दिल मेरा रह गया हूँ जो सबसे अभागा यहां मन नहीं करता इस ज़माने में रहने का रह गया हूँ जो ज़माने से बेगाना यहां - शिनाख्त