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Showing posts from September, 2025

शून्य पर सवार

मैं शून्य पे सवार हूँ… मैं शून्य पे सवार हूँ बेअदब सा मैं खुमार हूँ अब मुश्किलों से क्या डरूं मैं खुद कहर हज़ार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ उंच-नीच से परे मजाल आँख में भरे मैं लड़ रहा हूँ रात से मशाल हाथ में लिए न सूर्य मेरे साथ है तो क्या नयी ये बात है वो शाम होता ढल गया वो रात से था डर गया मैं जुगनुओं का यार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ भावनाएं मर चुकीं संवेदनाएं खत्म हैं अब दर्द से क्या डरूं ज़िन्दगी ही ज़ख्म है मैं बीच रह की मात हूँ बेजान-स्याह रात हूँ मैं काली का श्रृंगार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ हूँ राम का सा तेज मैं लंकापति सा ज्ञान हूँ किस की करूं आराधना सब से जो मैं महान हूँ ब्रह्माण्ड का मैं सार हूँ मैं जल-प्रवाह निहार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ –  ज़ाकिर ख़ान

कमबख्त दिल

कितनी बार टूटा ये दिल  पर मरता क्यूँ नहीं  इतनी बार पिघलता है ये  आखिर संभलता क्यूँ नहीं  क्या खोट है इसके अंदर  क्या छुपा है इसके अंदर  हर बार लगता है डर  फिर भी ये डरता क्यूँ नहीं  हर बार जब किसी को छोड़ता हूँ  सोचता हूँ की इसके बगैर कैसे जी पाऊँगा  खुद को नहीं समझा पाता हूँ कि  कैसे इस गम को पी पाऊँगा  पर पता नहीं क्या होता है इसे  ये फिर धड़कता है  ऐसा क्या मिल जात है कि  फिर धहकता है  पर अब थोड़ा इस पर काबू लाना है  हर किसी के लिए नहीं खुद को पिघलाना है  थोड़ा समय खुद पर लगाना है  इस आंधी दौड़ से खुद को बचाना है                                                          -शिनाख्त 

Unsend letter

तुम्हें याद करता हूँ तुम्हें याद करता हूँ, बहुत याद करता हूँ। तुम्हारी हर हँसी अब क्यों मुझे रुलाती है? तुम तो जा चुकी हो, फिर ये कमबख़्त याद क्यों आती है? तुम्हारा वो प्यार से खाना खिलाना, तुम्हारा वो ज़ोर से गले लगाना, याद करता हूँ, बहुत याद करता हूँ। मेरा खुद को न समझ पाना, तुम्हारा मुझे समझाना। ग़लती किसकी थी, पता नहीं, फिर भी तुम्हारा मुझ पर हक़ जमाना। मैं तो नासमझ था, तुम तो समझदार थी। मैं तो बावला था, तुम तो होशियार थी। मैंने खुद को समझा तुम्हारे जाने के बाद। अब खुद को सँवार भी लिया तुम्हारी बातों के साथ। तुम्हें कितनी बार याद करूँ? यादों की सीडी को कितना रीवाइंड करूँ? तुम्हें याद करके दुख होता है, पर वही दुख यादों का सहारा भी बन जाता है। मैं खुद को सँवार रहा हूँ, खुद को आगे बढ़ा रहा हूँ। तुम्हारी कही हर बात साबित करूँगा। परवाना था, परिंदा बना, यूँ ही नहीं मरूँगा। ये तुम्हारा प्यार ही था, जिसने मुझे हिम्मत दी। तुम तो चली गईं, तुम्हारा प्यार रह गया। बातें रह गईं, यादें रह गईं। रह गया वो एहसास और एक आग रह गई। तुम शायद इसे कभी न पढ़ो, पर जब भी पढ़ो… याद रखना, मैं मना करता था कि मैं...

THE DARK SIDE OF ROMANTIC LOVE

there is a previous post named as dil-band in this blog, just before this post. in that post, i tried to say that i am no longer searching for love; this post is a justification of my background thinking as why not to chase love. love is a complete package, it shines like sun but it can burns you like hell. it can be piece of cake that taste very good and still kills you as poison. you have already know about the glorious side of this love as in movies, songs, web series or wherever you go. but the ugly side or better say dark side told us about it can cause depression, anxiety, trust issues , commitment issues. it can make people go mad. it can devour someone of every good thing in life. it can make people suffer more than one could imagine and this all is the complete package of love.  in my life, i also enjoy someone touch, someone's presence , engaging with someone romantically , cuddling someone ...and when its not there i feel void...this void is due to only positive side of ...

दिल–बंद

ये दिल अब किसी के लिए पिघलेगा नहीं कोई मुझे प्यार करे ,मुझे समझ पाए  ऐसा कोई ज़रूरी तो नहीं  कोई उम्मीद न पालो ज़माने से  दिल को दीवारों के अंदर रखो  और चाबी उसकी समय को दे दो  हर किसी पर प्यार लुटाओ दिल नहीं  खुद को भी प्यार करो  खुद पर दया करो  खुद पर काम करो  खुद को खुश रखो  जिन बुलंदी के सपने देखते हो  एक बार उनको पा कर तो देखो  अभी वक्त नहीं है इश्क का जुआ खेलने का  अगर हार गया तो कुछ नहीं बचेगा मेरे पास  थोड़ा दुख होगा पर संभल जाएगा  कुछ दिल अजीब लगेगा पर ढल जाएगा  एक नहीं हजारों हैं प्यार के लिए  सिर्फ दिल नहीं लुटाना एक पर,न किसी पर  अब मैं नहीं ढूंढता किसी को  अब कोई मुझे आकर ढूंढेगा                                                        – शिनाख्त           

RELATIONSHIP TRUTH 101

It is the small thing and it actually works if you want to test your relationship is    meeting the demand supply of your emotions. what you can give , or what you can expect in return...  its tough but it works  and if that demand supply chain does not meet, let that relationship go...its tough but let it go... Being honest and vocal is the pre requisite for it

शांति

ना ख़ुशी है ना दुख है ना भयावह है ना तुच्छ है ना मन है ना माया है ना शोर है ना साया है ना उदास है ना कठोर है ना विरह है ना चकोर है ना विरक्ति है ना भाव है ना आँधी है ना शांत है ना मिलना है ना बिछड़ना है ना बोलना है ना पूछना है बस एक पेड़ है एक हवा है कुछ पत्तियाँ हैं और मैं हूँ शायद यही शांति है और मन ख़ाली है।।                           – शिनाख्त 

HANDLING EMOTIONS

this is the very true, pre requisite nature of being adult. sometimes emotions hit like a storm , giant waves and boom you are no where...confused as hell and nothing to be anchor... so the question lingers in my head what to do, how to find anchor or better how to manage and handle emotions. patience is the key.  Be gentle with emotions please  Be honest first and foremost. step 1 : accept the emotion . its okay to feel so...its really okay to feel so...allow yourself to feel so...dont punish yourself to not even allowing yourself to feel any emotions because you can't. you are a human at the core and you can't fight your biology.  step 2: Dont fuel it. its okay to feel and act. reduce it slowly slowly. sometimes allowing yourself to do what your emotions wants you to do...but reduce it over a longer period of time.  because if you straight up cut it , you will be miserable.  step 3: then one day, try to eliminate or change it.    and this is in regar...

Let it GO

 

बलि

तुम्हें लगता है जो मिल गया है मुझे आसानी से एक हिस्सा मैंने गवाया है खिलती अपनी जवानी से वो इश्क़ था जो आँखों से बह रहा था और तुम्हें लगता है लड़के रोते हैं बेइमानी से तुम वाह-वाह करते हो सुनकर मेरी बातें मैं किस ग़म से गुज़रता हूँ उन्हें कागज़ पर लाने से खुद को बुलंद कर भी लिया और पा भी ली मंज़िल एक उम्र बीत गई मेरी,  खुद के ग़म को समझाने से                                                              –शिनाख्त 

love and void and work

do not try to chase the love. i have committed a mistake which is to forget one , date other. when first crush rejected, i dated other , then the other girl has some issues , then third...and so on...but now i got it. its no longer there. accept this pain of loneliness and this void. the void has to be there...it will work as an anchor for me...acceptance this pain hurts but it got ease with time. this emotional stability i am getting feels like peace. now i am working towards and it just feels good.  there was a constant search that went for much time , its the search of my better half. i tried to find the love, but never got so. the romantic love in my life is zero. whenever i met a person, i expect that this person will stop my quest but it ain't so. the expectation shatters as hell then it hurts and it is hurting a lot nowadays. there is a scene in the rockstar movie , when the lead actor ranbir as jordan or better say janardhan was lying in his bath tub, watching his guitar bu...

Saiyaara

मुझे तसल्ली दे दे जो  वो शब्द उधारा ढूंढ रहा है एक सितारा ढूंढ रहा है दिल सैयारा ढूंढ रहा है, सैयारा मतलब वो तारा  जो एक जगह ये ना ठहरे फिर भी अपनी चमक ना बदले  चाल ना बदले और ना बदले वो चेहरे,  अम्बर जैसा एक समन्दर  चाँद है कश्ती पानी में  देखो ज़ोर जवानी में  एक किनारा ढूंढ रहा है, दिल सैयारा ढूंढ रहा है दिल सैयारा, ढूंढ रहा है।                                 – वानी बत्रा 

अंतिम ऊंचाई

कितना स्पष्ट होता आगे बढ़ते जाने का मतलब अगर दसों दिशाएँ हमारे सामने होतीं, हमारे चारों ओर नहीं। कितना आसान होता चलते चले जाना यदि केवल हम चलते होते बाक़ी सब रुका होता। मैंने अक्सर इस ऊलजलूल दुनिया को दस सिरों से सोचने और बीस हाथों से पाने की कोशिश में अपने लिए बेहद मुश्किल बना लिया है। शुरू-शुरू में सब यही चाहते हैं कि सब कुछ शुरू से शुरू हो, लेकिन अंत तक पहुँचते-पहुँचते हिम्मत हार जाते हैं। हमें कोई दिलचस्पी नहीं रहती कि वह सब कैसे समाप्त होता है जो इतनी धूमधाम से शुरू हुआ था हमारे चाहने पर। दुर्गम वनों और ऊँचे पर्वतों को जीतते हुए जब तुम अंतिम ऊँचाई को भी जीत लोगे— जब तुम्हें लगेगा कि कोई अंतर नहीं बचा अब तुममें और उन पत्थरों की कठोरता में जिन्हें तुमने जीता है— जब तुम अपने मस्तक पर बर्फ़ का पहला तूफ़ान झेलोगे और काँपोगे नहीं— तब तुम पाओगे कि कोई फ़र्क़ नहीं सब कुछ जीत लेने में और अंत तक हिम्मत न हारने में।                                            – कुंवर नारायण 

दरिया और प्यासा

मैं जितना चाहता हूँ तुम्हें  मुझे तुम उतना नहीं चाहती, बस यही बात मेरे दिल को हर पल खूब सताती। मैं तो दरिया हूँ, प्यासे के इंतज़ार में बहता, प्यार से भरी आँखें कोई देख ले तो हर ज़ख्म को आराम से सहता  पर प्यासे के न आने से दरिया कभी सूखते नहीं, जो अपने सच में होते हैं, वो दूर होते हैं पर छूटते नहीं। जिसने जितना चाहा, उसी में मैं खुश, जितना भी मिला किसी से, उसी में मैं संतुष्ट  किसी ने पलभर भी याद किया, उसका आभार, ज़माने में कौन मिलता है दो पल के लिए भी बार-बार? मिल जाए तो ऊपरवाले का करूं मैं शुक्र हज़ार। जो छूट गए पहले लोग  उनका कोई दोष नहीं  बस उनसे कोई मेल नहीं  जो बचे हैं मेरे पास वही मेरे सही  जैसे बर्फ से पानी और  उससे साफ पानी बनने में  कई चीजें छूट जाती है  पर जो बची रह जाती है वो कमाल की होती है और  पानी और वो चीजें एक हो जाती हैं। तुम न मिले तो कोई बात नहीं  लंबी है हम की शाम पर रात नहीं  और कोई मुझे मेरे जैसा मिल जाएगा  इसी उम्मीद पर कायम है मेरे हालात भी               ...

Infatuation

जो बैठ जाए सामने, तो कब तक तुझे निहारूँ  अपने ख्वाबों में कब तक तुझे सवारूँ  अपनी पलके तक न झपकाऊँ पल भर भी  तू बता ऐसे हालत में कितने जमाने गुज़ारूँ  रात भर की नींद छोड़ूँ  दिल को बैचनी से फोड़ूँ  खुद को तोड़ लिया है बुराई से  और बता क्या क्या तोड़ूँ  साल भर का काम एक बार में करूँ  दिन रात तुझे याद में करूँ  अब तुझे ख्वाब में मिलू  और क्या ख्वाब अपने पूरे करूँ  ये कैसा रिश्ता है समझ नहीं आता  शायद ये नयापन है, दिल यही बताता  ये भी ढल जाएगा ,  और मैं खुद से क्या छुपाता ये बस एक नया एहसास है  अच्छा है और खास है  ज़िंदगी का एक और हिस्सा है  जैसा भी है , दिल में सांस है                                         - शिनाख्त